गुरुवार, 26 मार्च 2009

अहं का विसर्जन

नमस्कार !!!!!!!!!!!!!!!
आज एक छोटी सी कहानी सुनाता हूं।

शून्यवादी नागार्जुन जब चीन पहुँचे तो वहाँ के सम्राट ने उनका भव्य स्वागत करने के बाद उनसे कहा: " मैं अहंकार से बुरी तरह पीड़ित हूँ, कृप्या कुछ करें।नागार्जुन ने कहा:"आधी रात गये अतिथि गृह में आना और हां अकेले मत आना अहंकार को भी साथ लिये आना" . नियम समयपर सम्राट अतिथि गृह के द्वार पर खड़ा था। नागार्जुन बोले, "अकेले आये हो, अहंकार को साथ नहीं लाये ?। सम्राट ने कहा, "वह तो मेरे भीतर बैठा है"। नागर्जुन बोले, "ऐसा ? तब उसे खोजो भीतर किस कोने में छिपा बैठा है । सम्राट को लगा यह आदमी तो पागल है, फिर भी वह चुप होकर बैठा गया। दो घड़ी बाद नागार्जुन ने पूछा, "मिला ?" । "कोशिश कर रहा हूं", सम्राट ने कहा । प्रत्यूंषवेला हो रही थी-एकाएक सम्राट जोर से हँसा- बोला "अब मैं समझ गया। आपका शून्यवाद " मैंपन" की ठसक से छुटकारे का दूसरा नाम है ।




साभार: दैनिक हिन्दुस्तान

6 टिप्‍पणियां:

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails