मंगलवार, 21 जुलाई 2009

जीवन निर्झर



क्यों मौन खड़े हो बतलाओ ?
क्यों रुके हुये हो समझाओ ?


क्या सुर्य - पवन - जल रुकते भय से ?

जीवन निर्झर सरिता स्वरूप,
यह बहता जल है स्वच्छ सरल


आरम्भ करो नूतन-नवीन,
रुकना कैसा तुम वीर सबल

तोड़ो कारा, तोड़ो प्रस्तर,
प्रारम्भ तुम्हारा उज्जवल है


माना बाधायें कम भी नहीं,
पर है असीम उत्साह तेरा

तुम करो प्रहार भीष्ण बल से,
तब द्वार खुलेंगे जीवन के


संगीत सुधा अविरल बहता,
है जीवन यह निश्चय चलता

जीवन निर्झर सरिता स्वरूप,
यह बहता जल है स्वच्छ सरल



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