देखा मैंने लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
देखा मैंने लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 18 फ़रवरी 2010

देखा मैंने

देखा उड़ते धूल कोDSC02305

कि

झूमते बबूल को

छांव में जो पल रहे

तृण, कर रहे अठकेलियां

वह भी जले वह भी मिटे

बच न सके ताप से ।

देखा जलते हुए तन को

और

घर्षण करते मन को

बूँद-बूँद टपकते,

और

खत्म होते समय को,

देखा पास आते प्रलय को ।

देखा सृजित होते , नष्ट होते

तीव्र सूक्ष्म कणों को

और

पराजित होते नियम को ।

अपनी हीं तलाश में

विकल और विक्षिप्त,

और

देखा आँखों से झड़ते

अश्रु कण को ।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails