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शुक्रवार, 4 दिसंबर 2009

तुम्हारी प्रतीक्षा में

 

मैं नहीं कहताfallen flower

कि तुम्हारे लिये

ले आऊँगा तोड़कर

चाँद तारे ।

मैं नहीं कहता

कि तुम्हारे लिये

बना दूँगा पहाड़ को धूल

और

झुका दूँगा आसमान को

जमीन पर ।

मैं तो बस ला पाऊँगा

तुम्हारे लिये

ओस में लिपटे

धूल से सने

डाली से गिरे

कुछ फूल

जिनमें अभी भी बांकी है सुगंध ।

बुधवार, 11 नवंबर 2009

चुप हो जाओ

 

 

 

 

 

 

 

 

 

कि एक हवा चली है

चुप हो जाओ

बह जाओ  ।

कि एक फूल खिला है

चुप हो जाओ

खिल जाओ ।

कि एक दीप जला है

चुप हो जाओ

जल जाओ ।

कि एक बादल निकला है

चुप हो जाओ

बरस जाओ ।

कि एक पत्ता टूटा है

चुप हो जाओ

खो जाओ ।

कि एक सूरज निकला है

चुप हो जाओ

भर जाओ ।

कि एक प्रेम मिला है

चुप हो जाओ

झुक जाओ ।

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