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रविवार, 10 मार्च 2013

सौ रुपये


“साहब सौ रुपये चाहिये !!!”
अपने झोले से खाली बोतल निकालकर मेरे सामने कर दिया उसने |
“साहब घर में तेल खत्म हो गया है, खाना नहीं बना अभी तक” |
रात के करीब नौ बज रहे थे |

“अरे अभी कल ही तो सौ रुपये दिये थे, सफाई के”
“वो तो खर्च हो गये”,
“सामान कितना मंहगा हो गया है साहब” |

“ठीक है, दारू – वारू तो नहीं पी लोगे ?”
“नहीं नहीं साहब” – जीभ काटकर उसने कहा |

सौ का नोट निकालकर उसके हाथ में रख दिया गया |
उसकी आँखें चमकी |
“पर देखो विवार को आकर सफाई कर जाना” |

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“सिर्फ पचास रुपये देने थे उसे भाई”
“हाँ ! लेकिन पूरा घर साफ किया था उसने यार, और बाईक भी धुलवाई थी”

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“अरे तुम तो आते ही रह गये ?, दो महने से घर गंदा पड़ा है”
“इस रविवार को पक्का आ जाना”
“हाँ साहब जरूर आऊँगा ”|

“अपना मोबाईल नम्बर बताओ”
अपने सारे दाँत बाहर निकाल दिये उसने – “साहब मोबाईल कहाँ है अपने पास”
“अच्छा ! – रविवार को जरूर आ जाना”
सौ रुपये की बात नहीं कर पाया उससे |

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अभी जब कमरा साफ करने लगा तो उसकी याद आ गयी या सौ रुपये ने उसकी याद दिला दी  |

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2009

कारण

ईश्वर के द्वारा बनायी गयी सबसे पहली दुनिया सभी दृष्टीकोणों से सम्पूर्ण थी। परन्तु पता नहीं क्यों यह दुनिया कुछ अधिक दिन तक चल नहीं सकी और नष्ट हो गयी ।


बहुत सोच-विचार के पश्चात ईश्वर ने पुनः एक नई दुनिया बनायी और इस बार उसने इस दुनिया में दुःख, दर्द, कष्ट, दया, प्रेम, घृणा, पश्चाताप और अनेकों कारण डाल दिये ।
और यह दुनिया आज तक चल रही है ।

गुरुवार, 26 मार्च 2009

अहं का विसर्जन

नमस्कार !!!!!!!!!!!!!!!
आज एक छोटी सी कहानी सुनाता हूं।

शून्यवादी नागार्जुन जब चीन पहुँचे तो वहाँ के सम्राट ने उनका भव्य स्वागत करने के बाद उनसे कहा: " मैं अहंकार से बुरी तरह पीड़ित हूँ, कृप्या कुछ करें।नागार्जुन ने कहा:"आधी रात गये अतिथि गृह में आना और हां अकेले मत आना अहंकार को भी साथ लिये आना" . नियम समयपर सम्राट अतिथि गृह के द्वार पर खड़ा था। नागार्जुन बोले, "अकेले आये हो, अहंकार को साथ नहीं लाये ?। सम्राट ने कहा, "वह तो मेरे भीतर बैठा है"। नागर्जुन बोले, "ऐसा ? तब उसे खोजो भीतर किस कोने में छिपा बैठा है । सम्राट को लगा यह आदमी तो पागल है, फिर भी वह चुप होकर बैठा गया। दो घड़ी बाद नागार्जुन ने पूछा, "मिला ?" । "कोशिश कर रहा हूं", सम्राट ने कहा । प्रत्यूंषवेला हो रही थी-एकाएक सम्राट जोर से हँसा- बोला "अब मैं समझ गया। आपका शून्यवाद " मैंपन" की ठसक से छुटकारे का दूसरा नाम है ।




साभार: दैनिक हिन्दुस्तान

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