सोमवार, 16 नवंबर 2009

केरल में बरसात, आम और नारियल के पेड़

 

यहाँ कोचिन (केरल) में हमारे मकान मालिक ने घर के चारो तरफ विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे लगा रखे है । ज्यादातर पेड़-पौधे नारियल, सुपाड़ी, आम, कठहल, अमरूद, मेंहदी, तुलसी, अमलतास और केले के है । काली मिर्च की लतरे सुपारी और अन्य पेड़ों पर चढ़ी रहती है । इन पेड़-पौधो के कारण घर के आस-पास का वातावरण बहुत हीं हरा-भरा और सदाबहार है । एक महत्वपूर्ण चीज यहाँ देखने को मिलती है कि अगर घर के आस-पास अगर थोड़ी सी भी जगह खाली रहे तो लोग पेड़ लगाने से नहीं चूकते है ।

 

यहाँ आपको सबसे ज्यादा नारियल के पेड़ देखने को मिल जायेगे । बहुत ही ज्यादा नारियल की पैदावार होती है यहाँ, फिर भी नारियल सस्ता नहीं । नारियल का एक डाभ 15-20  रूपये से कम में नहीं मिल पाता है । और ऐसा इस लिये कि यहाँ नारियल की खपत बहुत ही अधिक है । भोजन बनाने में नारियल के तेल का ही प्रयोग होता है और अधिकतर व्यंजनो में भी

 

 

यहाँ हमारे मकान के अगल-बगल 5-6 आम के पेड़ लगे हुए हैं । मकान के ठीक सामने जो पेड़ है वह आजकल ताँबे की तरह चमकदार नयी पत्तियों से भर गया है । कई दिन हुए पूरा पेड़ में नये कलश निकल आये है । आम के पेड़ो में मंजर आ चुके है और कुछ में तो छोटे-छोटे टिकोले भी । बहुत ही आश्चर्य होता है यह सब देखकर । अभी तो नवम्बर ही बीत रहा है और यहाँ आम फलने शुरू हो गये !!! अपने यहाँ तो फरवरी-मार्च से आम के पौधे मंजर लेने शुरू करते है ।

 

यह विविधता दोनों जगह जगह की जलवायु मे अंतर के कारण है । उत्तर भारत में अभी सर्दी की शुरूआत हो रही होगी और यहाँ सर्दी पड़ती ही नहीं है । वर्ष के सभी महिने समशीतोष्ण रहते है । पिछले कई दिनों से यहाँ अच्छी वर्षा हो रही है । यह लौटती हुई मानसून (उत्तर-पूर्व मानसून) की वर्षा है । इस प्रत्यावर्तित मानसून के कारण केरल और तामिलनाडू में काफ़ी वर्षा होती है । केरल की हरियाली का कारण यहाँ की वर्षा है । देश के बहुत कम हिस्से में इतनी अधिक वर्षा होती होगी जितनी यहाँ होती है । कहते है यहाँ बादल बूँद-बूँद नहीं बरसता, बस उडेल देता है । और यह सच भी है ।

15 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छी सचित्र जानकारी

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  2. हरे भरे केरल की इस सचित्र जानकारी ने वर्षों पहले केरल भ्रमण की याद को ताजा कर दिया है ...!!

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  3. आभार जानकारी एवं चित्रों का.

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  4. इस से सुन्दर जगह और क्या हो सकती है ..:) बहुत अच्छा लगा हरा भरा सब तरफ देख कर ..शुक्रिया इस जानकारी के लिए

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  5. बहुत ख़ूबसूरत जगह है, काफी साल हो गए कोच्ची गए हुए, पहले जब भी जाता था तो वहाँ से एक दिन का समय निकाल वहा से ६०-७० किलोमीटर की दूरी पर अथिरापल्ली (शायद ठीक से नाम को उच्चारित नहीं कर पा रहा हूँ ) वाटर फाल्स देखने जरूर जाता था !

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  6. सुंदर चित्रों से सजी अच्छी जानकारी .........

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  7. @पी.सी.गोदियाल जी, मैं भी इथिरापल्ली गया हूँ, सच में बहुत ही अच्छी गजह है यह ।

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  8. सम्पूर्ण जानकारी .........अच्छा लगा जानकर

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  9. तबियत हरी हो गई.....
    सुंदर वर्णन

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  10. CHANDAN JI BAHUT BADIA LEKH AAM PAR ...JEE CHAHNE LAGA HAI AISE HI KISI GAON KI YATRA KE LIYE ..BAHUT ACHHA GADHY HAI AAPKE PAS ..AACHARY HAZARI PRASAD DVIVEDI KA NIBANDH "AAM PHIR BORA GAYE" AAPNE PADA HOGA .. MERE ANURODH PAR EK BAR PHIR PADIYEGA..

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  11. किसी पेड़ पर लदे हरे हरे आमों को देख कर ही मन प्रसन्न हो जाया करता है। मिथिलांचल के आमों की ये चित्रात्मक झाँकी अच्छी लगी।

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  12. सुंदर चित्रों से सजी अच्छी जानकारी .........

    झाँकी अच्छी लगी।

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  13. यार केरल घूमने की हमारी भी बड़ी तमन्ना है..
    ..देख्ते हैं..कब इंट्री मिलती है..गॉड्स ओन कंट्री मे..

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