बुधवार, 15 अप्रैल 2015

समय की स्याही

वह धोता है अपनी तलवार

रक्त की ऊष्मा से ।

वह चुनता है सत्य को

ताकि समय की स्याही

उसे याद रख सके  ।

किन्तु बच नहीं पाता वह भी

समय द्वारा

खण्डहर होने से  ।



1 टिप्पणी:

  1. Agreed with your feelings expressed through your poem. anyone who wants name and fame with true values have to also taste and smell the " sword of time".... keep it up chandan ji .. it feels good to see your poem after a long gap....

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