रविवार, 3 मई 2009

एक सैनिक का आत्म कथ्य


मेरी आँखो मे बिजलीयाँ कौंध जाती है

आंधीयाँ जब जब तूफान बन आती है।

तूफान जब जब विनाश बन आता है,
मेरे बाजुओं मे अपार शक्ति भर जाता है।






मेरा पग पल पल मृत्यु की तरफ बढता जा रहा है,
अब तो रक्त बहाने का समय भी आता जा रहा है।




इस मिट्टी को रक्त से लाल कर दूंगा,

दुश्मनों के लिये रक्त का समुद्र खडा कर दूंगा।

वह शक्ति है भुजाओं में जो पहाड़ो को भी धूल बना दे।


वह विश्वास है हृदय में जो पत्थरों को भी मोम कर दे।




है कोई मझधार नहीं, जो मुझको डुबो सके।

है कोइ दीवार नहीं, जो मुझको रोक सके।

है कोई ऊँचाई नहीं, जिसे मैं छू न सकूं।

है कोई गहराई नहीं, जिसमें मैं डूब सकूं।




तनहाईयों में जीकर जीतने की चाहत है मुझमें,
गोलियां पीठ पर नहीं,
ीने पर खाकर मरने की आदत है मुझमें।

दुश्मनों की गोलियों को प्रेमी समझ सीने से लगाता हूं,
भूख को प्रेम विरह समझ अपनाता हूं,
बन्दूकें मेरे हाथों में, उसके हाथ होने का एहसास दिलाता है,
इससे निकली गोलियाँ, हृदय को सुकून दिलाता है।




प्रलय में पले हुए है, विनाश में बढे हुए है।

सुबह हो या शाम हो, शीत हो या घाम हो।

मिट्टी ने विकास किया, अग्नि ने प्रकाश दिया।

बाधाओं ने हीं हमें बढने का एहसास दिया।



सर
पे कफ़न बांध कली की तरह ईठलाता हूँ,
जब मरता हूँ तो फूल की तरह खिल जाता हूँ।

जब मेरे शरीर के टुकड़े धरती पर फैल जाते है,
स्वंय को मां के चरणों में न्योछावर पाता हूँ।




मृत्यु के समीप हूँ, घायल हूँ मृत हूँ।

पैर रुक गये है मेरे हाथ झुक गये है मेरे।

रुक गयी क्यों हो मेरे धर की गति।

एक इच्छा हॄदय में है प्राप्त करुं वीरगति।




हिम की बरसात हो या रेत का तूफान हो।

काटों की चुभन हो या विषों का उफान हो।

विधाता से एक यही प्रार्थना है,
तब भी मेरे मुख पर अविचल मुस्कन हो।





(31 जुलाई 2000)


8 टिप्‍पणियां:

  1. नमन मेरा है वीरों को, चमन को भी नमन मेरा।
    सभी प्रहरी जो सीमा पर, है उनको भी नमन मेरा।
    नहीं लगते हैं क्यों मेले शहीदों की चिताओं पर,
    सुमन श्रद्धा के हैं अर्पण, उन्हें शत शत नमन मेरा।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

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  2. Bohot sundar prastutee....har shahadatko meraabhee naman hai, jo is mulk yaa insaaniyat ko zindaa rakhneke khaatir kee gayee ho...!
    Sasneh
    shama

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  3. बहुत अच्छी कविता. आप बहुत अच्छा लिखते हैं. इंजीनियरिंग के छात्र से कविता सुनना रोचक है:)

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  4. अति उत्तम!!!
    एक सैनिक की मनःस्तिथि एवं वीरता का सटीक चित्रण|
    साथ ही उन वीरों और शहीदों को मेरा शत-शत नमन||
    हमसफ़र यादों का.......

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  5. अरे वाह वाह.........क्या बात है.....बड़े वीर बाँकुरे मैदान में आ गए हैं.....चलो हम भी देखते है होता है आगे-आगे क्या........!!

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  6. आपका लेख प्रशंशा योग्य है!
    अच्चा.. क्या आप मुझे ये बता सकते हैं कि मै अपने द्वारा बनाये गए animation और videos किस प्रकार से चिठ्ठाजगत के माध्यम से लोगो तक पंहुचा सकता हूँ?

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  7. यह कविता मन को छूती है,
    इसमें जितनी मजबूती है,
    वह रचनाकार की ताकत है!

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  8. बहुत बढ़िया कविता लिखा है आपने! ऐसे ही लिखते रहिये!

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